“अभिनेत” और “चंडीगढ़ आर्ट अलाइव” ने “मंच पर कहानियां” से बिखेरे रंग; विजय कपूर के निर्देशन में मंचित हुईं 7 जीवंत कहानियां
Chandigarh (sehajdhara bureau), 30 August:

शहर की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित नाट्य संस्था “अभिनेत” ने “चंडीगढ़ आर्ट अलाइव” के संयुक्त तत्वावधान में सेक्टर 27 स्थित श्री औरबिंदो भवन में “मंच पर कहानियां” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। 29 अगस्त को आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक संध्या में देश के जाने-माने कहानीकारों ने अपनी ही रचित कहानियों को एकल अभिनय (मोनोलॉग) के माध्यम से मंच पर जीवंत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस पूरे नाट्य समारोह का कुशल निर्देशन रंगकर्मी विजय कपूर द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विविध सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और संवेदनात्मक विषयों पर आधारित 7 प्रमुख कहानियों की प्रस्तुति दी गई; “प्रतिकार” (लेखक व अभिनेता: गौरव आहूजा): 1984 के दंगों के दर्द, व्यवस्था की विफलता और मानवीय अंतरात्मा के मनोवैज्ञानिक द्वंद्व को उकेरती कहानी, जो दर्शाती है कि प्रतिशोध कभी शांति या न्याय नहीं दिला सकता। “सिमरन “(लेखिका व अभिनेत्री: डॉ. सारिका धुपड़): एक अध्यापिका के नजरिए से पारिवारिक प्रताड़ना और संवेदनहीन व्यवस्था के बीच घुटती एक मासूम मेधावी छात्रा के दर्दनाक अंत की मार्मिक प्रस्तुति। “फिरकी बंदर” (लेखक व अभिनेता: रविंदर टंडन): सुमित के एकल अभिनय के जरिए एक धोबी के बेटे ‘किशनी पाल’ के माध्यम से यह संदेश देती कहानी कि महानता पद या पढ़ाई से नहीं, बल्कि कर्म और करुणा से तय होती है।

“घट-घड़ा-घड़ौली” (लेखक व अभिनेता: डॉ. विमल कालिया ‘विमल’): आधुनिक एनआरआई शादियों, दिखावे और वीजा की जटिलताओं पर तीखा व्यंग्य, जो 1925 की ‘घट विवाह’ परंपरा को 2025 की समस्याओं का प्रासंगिक समाधान बताती है। “रिक्त स्थान” (लेखिका व अभिनेत्री: सीमा गुप्ता): मानसी के माध्यम से पिता-पुत्री के अनकहे रिश्तों, अस्पताल के संघर्ष और किसी अपने के जाने के बाद जीवन में बचे खालीपन का भावुक चित्रण। “प्रेम-पत्र”(लेखक व अभिनेता: डॉ. पंकज मालवीय): सुषमा के किरदार के माध्यम से अनपढ़ता के दर्द, पति के प्रति शंका और अंततः अक्षर ज्ञान से मिले आत्मसम्मान व महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी। “रेत, रडार और प्रेम” (लेखक व अभिनेता: विजय कपूर): युद्ध और तकनीक के मशीनी युग के बीच दानियाल व परवाज के प्रेम के जरिए यह संदेश कि बारूद और विनाश के खिलाफ मानवीय संवेदनाएं ही सबसे शांत और गहरा प्रतिरोध हैं। विजय कपूर के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत इन कहानियों के सशक्त अभिनय और जीवंत प्रस्तुतीकरण ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इस कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग रहा बबीता कपूर का। विशेष सहयोग रहा दिव्या करवाल और मीनू का। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित प्रेक्षकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। संस्था “अभिनेत” ने भविष्य में भी साहित्य और मंच कला के ऐसे अनूठे मेल को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करते रहने का संकल्प जताया।
विजय कपूर, अध्यक्ष, अभिनेत थिएटर ग्रुप, चंडीगढ़ – 92179 89809